रिपोर्ट राकेश बाबू टीवी 1 न्यूज़ नेटवर्क
राजघराने के युवा उद्योगपति ने पॉलीहाउस खेती में बनाया सफलता का मॉडल, अब कृषि पर्यटन हब बनाने की तैयारी
पीलीभीत के राजघराने की विरासत केवल उद्योग, शिक्षा और सामाजिक सरोकारों तक सीमित नहीं रही, बल्कि अब इसी परिवार की नई पीढ़ी आधुनिक खेती में भी सफलता की नई कहानी लिख रही है। राजघराने से जुड़े युवा उद्योगपति एवं उन्नत किसान आयुष अग्रवाल ने अपने दादा स्वर्गीय राजा रामनाथ और पिता स्वर्गीय आदित्य अग्रवाल से मिली सीख को आधुनिक कृषि तकनीक से जोड़कर खेती को लाभकारी व्यवसाय का नया स्वरूप दिया है।

पकड़िया नौगवां स्थित फार्म हाउस पर आयुष अग्रवाल ने पॉलीहाउस, हाईटेक नर्सरी और बागवानी के जरिए ऐसा कृषि मॉडल तैयार किया है, जहां कम क्षेत्रफल में आधुनिक तकनीक के सहारे बेहतर उत्पादन और आमदनी हासिल की जा रही है। रंगीन शिमला मिर्च की पहली ही फसल में प्रति एकड़ करीब 25 से 30 लाख रुपये का उत्पादन हासिल कर उन्होंने जिले के किसानों का ध्यान अपनी ओर खींचा।
दादा राजा रामनाथ की विरासत से मिली प्रेरणा
आयुष अग्रवाल के दादा स्वर्गीय राजा रामनाथ पीलीभीत के राजघराने की प्रतिष्ठित शख्सियतों में रहे। ललित हरि चीनी मिल से जुड़े राजा रामनाथ ने क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चीनी मिल के माध्यम से पीलीभीत के अलावा आसपास के क्षेत्रों के लोगों को भी रोजगार के अवसर मिले।

राजघराने की ओर से शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में भी योगदान रहा है। पीलीभीत के पुराने शिक्षण और चिकित्सा संस्थानों से परिवार की विरासत जुड़ी रही है शहर की कई सड़कों और स्थानों के नाम भी राजघराने के सदस्यों की स्मृतियों से जुड़े हुए हैं।
इसी पारिवारिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए आयुष अग्रवाल ने उद्योग के साथ खेती को भी अपने कार्यक्षेत्र का हिस्सा बनाया। उन्होंने परंपरागत खेती के बजाय वैज्ञानिक तकनीक, शोध, फसल प्रबंधन और बाजार की मांग को आधार बनाकर खेती की नई राह चुनी।
रंगीन शिमला मिर्च ने बदली खेती की तस्वीर
पकड़िया नौगवां स्थित फार्म हाउस पर बनाए गए दोनों पॉलीहाउस करीब एक-एक एकड़ क्षेत्र में हैं। नियंत्रित वातावरण में रंगीन शिमला मिर्च की खेती का प्रयोग बेहद सफल रहा। पहली ही फसल में प्रति एकड़ 25 से 30 लाख रुपये के उत्पादन ने इस मॉडल को खास बना दिया।

आयुष अग्रवाल का मानना है कि आधुनिक समय में खेती को लाभकारी बनाने के लिए केवल भूमि और मेहनत पर्याप्त नहीं है। किसान को तकनीक, बाजार की मांग, गुणवत्तापूर्ण पौध, उत्पादन प्रबंधन और फसल की बिक्री के बेहतर बाजार की जानकारी भी होनी चाहिए। इसी सोच के साथ फार्म हाउस पर लगातार नए प्रयोग किए जा रहे हैं।
इस पूरी परियोजना में ग्रोइंग मैनेजर महावीर सिंह की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। उनकी देखरेख में फसल प्रबंधन, पौधों की देखभाल और उत्पादन से जुड़े कार्यों को व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जा रहा है।
हाईटेक नर्सरी में तैयार हो रही पौध
फार्म हाउस पर पॉलीहाउस के साथ हाईटेक नर्सरी भी विकसित की गई है। यहां शिमला मिर्च सहित विभिन्न सब्जियों की पौध तैयार की जा रही है। वर्तमान में पॉलीहाउस में खीरे की फसल लगाने की तैयारी चल रही है।
लगातार अलग-अलग फसलों के प्रयोग और फसल चक्र के माध्यम से कम भूमि में अधिक उत्पादन हासिल करने का प्रयास किया जा रहा है। इससे किसानों को यह समझने का अवसर मिल रहा है कि आधुनिक तकनीक अपनाकर पारंपरिक खेती की तुलना में बेहतर परिणाम कैसे हासिल किए जा सकते हैं।

ड्रैगन फ्रूट से लेकर अमरूद तक, बागवानी का भी विस्तार
फार्म हाउस पर केवल सब्जियों की खेती ही नहीं की जा रही, बल्कि फलदार बागवानी को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। यहां चीकू, नारंगी, संतरा सहित विभिन्न फलदार पौधे लगाए गए हैं।
वर्तमान में खेतों में ड्रैगन फ्रूट की फसल तैयार है और इसकी दो बार तुड़ाई भी हो चुकी है। वहीं अमरूद की भी अच्छी पैदावार मिल रही है। इस तरह फार्म हाउस पर सब्जी उत्पादन के साथ-साथ फल उत्पादन और बागवानी को भी कृषि मॉडल का हिस्सा बनाया गया है।
खेती में निहारिका अग्रवाल की भी रुचि
आयुष अग्रवाल की पत्नी निहारिका अग्रवाल भी खेती में रुचि रखती हैं। जब भी वह फार्म हाउस पहुंचती हैं तो फसलों की स्थिति, उत्पादन और आधुनिक तकनीकों की जानकारी लेती हैं। परिवार की अगली पीढ़ी में खेती के प्रति यह रुचि पारिवारिक कृषि विरासत को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कर चुके हैं सम्मानित
आधुनिक एवं नवाचारी खेती के क्षेत्र में आयुष अग्रवाल के प्रयासों को देखते हुए उन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है। पॉलीहाउस खेती में मिली सफलता ने यह दिखाया है कि आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक प्रबंधन के जरिए खेती को बेहतर आय का माध्यम बनाया जा सकता है।
अब फार्म हाउस बनेगा कृषि पर्यटन हब
पॉलीहाउस और हाईटेक खेती में सफलता के बाद अब फार्म हाउस को कृषि पर्यटन एवं प्रशिक्षण हब के रूप में विकसित करने की तैयारी है। ग्रोइंग मैनेजर महावीर सिंह ने बताया कि जल्द ही किसानों को यहां आधुनिक खेती की तकनीकों का निशुल्क प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की योजना है।
किसान फार्म हाउस पर पहुंचकर पॉलीहाउस खेती, हाईटेक नर्सरी, फसल प्रबंधन, पौध तैयार करने, उत्पादन बढ़ाने और खेती की अन्य बारीकियों को मौके पर देखकर सीख सकेंगे। यहां किए जा रहे सफल कृषि प्रयोगों को किसानों के सामने मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।
महावीर सिंह ने बताया कि किसानों को आधुनिक खेती की तकनीकों से परिचित कराने का उद्देश्य उन्हें कम भूमि में अधिक उत्पादन और बेहतर आमदनी के लिए प्रेरित करना है। प्रशिक्षण के दौरान किसानों को केवल जानकारी ही नहीं दी जाएगी, बल्कि फार्म पर चल रहे प्रयोगों और फसलों को प्रत्यक्ष रूप से दिखाकर तकनीक की बारीकियां समझाई जाएंगी।
किसानों के लिए बनेगा जीवंत कृषि मॉडल
कृषि पर्यटन हब के रूप में विकसित होने के बाद यह फार्म हाउस किसानों के लिए एक तरह की जीवंत कृषि प्रयोगशाला बन सकता है। यहां किसान पॉलीहाउस, हाईटेक नर्सरी, रंगीन शिमला मिर्च, खीरा, ड्रैगन फ्रूट, स्ट्रॉबेरी और विभिन्न फलदार फसलों को देखकर आधुनिक कृषि की संभावनाओं को समझ सकेंगे।
राजघराने की विरासत से मिली खेती की सीख को आधुनिक तकनीक से जोड़कर आयुष अग्रवाल ने कृषि क्षेत्र में एक ऐसा मॉडल तैयार किया है, जो परंपरा और तकनीक के संगम की मिसाल पेश करता है। उनका यह प्रयोग संदेश देता है कि खेती को वैज्ञानिक सोच, आधुनिक तकनीक और बाजार की समझ के साथ किया जाए तो सीमित भूमि भी बड़ी आमदनी का जरिया बन सकती है।
अब निगाह इस बात पर है कि फार्म हाउस को कृषि पर्यटन एवं प्रशिक्षण हब के रूप में विकसित करने की योजना कब धरातल पर उतरती है। यदि यह पहल सफल होती है तो पीलीभीत के किसानों को आधुनिक खेती सीखने के लिए एक ऐसा केंद्र मिलेगा, जहां वे तकनीक को किताबों में नहीं, बल्कि खेत में काम करते हुए प्रत्यक्ष रूप से सीख सकेंगे।
