आरोपी को बचाने के लिए रची जा रही साजिश
संवाददाता अरुन धर्मपाल की रिपोर्ट/
पीलीभीत:थाना गजरौला क्षेत्र में ग्राम प्रधान और पुलिस के बीच विवाद का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। एक ओर जहां ग्राम प्रधान ने थाना प्रभारी और पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए मारपीट, जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल और रिश्वत मांगने का आरोप लगाया है, वहीं पुलिस पक्ष का कहना है कि यह सब कार्रवाई से बचने और आरोपी को बचाने के लिए रची जा रही साजिश है।
पीड़ित ग्राम प्रधान वीरपाल ने पुलिस अधीक्षक को दिए शिकायती पत्र में आरोप लगाया कि वह अपने गांव के एक पारिवारिक विवाद को सुलझाने के लिए थाने पहुंचे थे। वहां थाना प्रभारी और अन्य पुलिसकर्मियों ने उनसे 40 हजार रुपये की रिश्वत मांगी। आरोप है कि रुपये देने से इनकार करने पर उनके साथ अभद्रता की गई, जातिसूचक शब्द कहे गए और थाने के भीतर मारपीट भी की गई। इतना ही नहीं, शिकायत करने पर फर्जी मुकदमे में फंसाने और मुठभेड़ कराने तक की धमकी देने का आरोप भी लगाया गया है। पीड़ित ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है और कहा है कि न्याय न मिलने पर वह उच्च अधिकारियों और न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।
वहीं दूसरी ओर पुलिस का पक्ष इससे बिल्कुल अलग सामने आ रहा है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक थाना गजरौला क्षेत्र में एक युवती की तहरीर पर एक युवक के खिलाफ जबरन शारीरिक संबंध बनाने का गंभीर मामला दर्ज किया गया था। बताया जा रहा है कि आरोपी युवक ग्राम प्रधान का करीबी रिश्तेदार है। पुलिस ने पीड़िता के बयान के आधार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
पुलिस का कहना है कि आरोपी को बचाने के लिए ग्राम प्रधान लगातार दबाव और सिफारिश कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने कानून के मुताबिक कार्रवाई की। इसी से नाराज होकर अब पुलिस की छवि खराब करने के लिए झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं। पुलिस यह भी बता रही है कि अजीतपुर पटवरा निवासी रूपलाल की तहरीर पर ग्राम प्रधान के खिलाफ मारपीट का मुकदमा दर्ज किया गया, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उन्हें 151 में चालान कर दिया।
मामले को लेकर पुलिस अधीक्षक सुकृति माधव मिश्रा का स्पष्ट संदेश है कि जिले में कानून से ऊपर कोई नहीं है। महिलाओं से जुड़े अपराधों में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है और किसी भी प्रकार का दबाव, सिफारिश या राजनीतिक प्रभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही झूठी शिकायतें और अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल यह मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। एक तरफ ग्राम प्रधान न्याय की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ पुलिस इसे कानून के खिलाफ दबाव बनाने की कोशिश बता रही है। पूरे मामले की सच्चाई जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।
