महिलाओं के अधिकार बनाम राजनीतिक विरोध: जन आक्रोश सम्मेलन का संदेश

पीलीभीत के गांधी प्रेक्षागृह में आयोजित जन आक्रोश सम्मेलन में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर सियासी माहौल पूरी तरह गरमा गया लोकसभा में इस बिल के विरोध को लेकर कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी ने खुलकर मोर्चा खोला और इसे महिलाओं के अधिकारों के साथ अन्याय बताया।

सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में प्रभारी मंत्री बलदेव सिंह औलख मौजूद रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता भाजपा जिलाध्यक्ष गोकुल प्रसाद मौर्य ने की। बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी ने इस आयोजन को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बना दिया।

प्रभारी मंत्री बलदेव सिंह औलख ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लाया गया नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है, लेकिन विपक्ष ने इसका विरोध कर यह साबित कर दिया कि वह महिलाओं के अधिकारों के प्रति गंभीर नहीं है उन्होंने महिलाओं से आह्वान किया कि वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें और इस तरह के विरोध का लोकतांत्रिक तरीके से जवाब दें। साथ ही उन्होंने केंद्र और प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न महिला कल्याणकारी योजनाओं रोजगार, सुरक्षा और स्वावलंबन—का भी विस्तार से जिक्र किया।

जिलाध्यक्ष गोकुल प्रसाद मौर्य ने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि भाजपा सरकार ने हमेशा महिलाओं को सम्मान और अवसर देने का काम किया है। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन दलों ने वर्षों तक महिलाओं को केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया, वही आज उनके अधिकारों के खिलाफ खड़े नजर आ रहे हैं।

पूर्व जिलाध्यक्ष संजीव प्रताप सिंह ने 33 प्रतिशत आरक्षण के मुद्दे को उठाते हुए कहा कि यदि यह बिल पारित होता तो महिलाओं की भागीदारी शासन और विकास में और अधिक सशक्त होती। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने राजनीतिक स्वार्थ के चलते इस महत्वपूर्ण बिल को आगे बढ़ने से रोक दिया।

बरखेड़ा विधायक स्वामी प्रवक्तानंद ने अपने संबोधन में “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता” श्लोक का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। उन्होंने कहा कि भाजपा इस परंपरा को आगे बढ़ाने का कार्य कर रही है, जबकि विपक्ष महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित करने की साजिश में लगा है।

पूरनपुर विधायक बाबूराम पासवान ने विपक्ष के रुख को महिलाओं के साथ धोखा बताते हुए कहा कि देश की महिलाएं इस घटना को कभी नहीं भूलेंगी। उन्होंने कहा कि आने वाले चुनावों में महिलाएं इसका जवाब जरूर देंगी और पुरुष भी इस लड़ाई में उनके साथ खड़े हैं।

नगर पालिका परिषद पीलीभीत की चेयरमैन आस्था अग्रवाल ने कहा कि संसद में विपक्ष द्वारा महिलाओं के अधिकारों का विरोध करना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि देश की महिलाएं अब जागरूक हो चुकी हैं और ऐसे मुद्दों को याद रखकर लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देंगी।

इस सम्मेलन में बड़ी संख्या में भाजपा पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे, जिनमें पूर्व जिलाध्यक्ष संजीव प्रताप सिंह, पूर्व विधायक किशन लाल राजपूत, महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष गीता मिश्रा, जिला उपाध्यक्ष रेखा सिंह परिहार, ब्लॉक प्रमुख सभ्यता देवी वर्मा, जिला मंत्री ऋचा पटेल, पंकज तिवारी, पुष्पा शुक्ला, शशि बाला कटियार, जिला महामंत्री मंगली प्रसाद वर्मा, अनुराग अग्निहोत्री, लेखराज भारती, अतेंद्र पाल सिंह, विकास श्रीवास्तव, विकास वाल्मीकि, रेनू राज, सृष्टि गुप्ता सहित कई अन्य कार्यकर्ता शामिल रहे।

यह सम्मेलन सिर्फ एक राजनीतिक विरोध तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने यह संकेत भी दिया कि आने वाले समय में महिलाओं के अधिकार और आरक्षण का मुद्दा चुनावी राजनीति का प्रमुख केंद्र बन सकता है। हालांकि, सवाल यह भी है कि क्या इस मुद्दे पर सभी दल मिलकर ठोस सहमति बना पाएंगे या फिर यह विषय राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच उलझा रहेगा।

नारी सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर राजनीति से ऊपर उठकर ठोस निर्णय लेने की जरूरत है, ताकि देश की आधी आबादी को वास्तविक रूप से उनका अधिकार और प्रतिनिधित्व मिल सके।

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