रिपोर्ट इंद्रजीत सिंह राजपूत/
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प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल क्या राजनीतिक दबाव में फंसाया जा रहा है किसान ललित वर्मा को हेमराज वर्मा की चेतावनी किसान को न्याय न मिला तो होगा बड़ा आंदोलन कल डीएम को ज्ञापन
पीलीभीत। आज जनपद मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई, जिसने स्थानीय प्रशासन की निष्पक्षता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यमंत्री हेमराज वर्मा ने ग्राम अण्डरायन के एक साधारण, परिश्रमी किसान श्री ललित वर्मा के खिलाफ दर्ज हुए मुकदमे को पूरी तरह फर्जी और द्वेषपूर्ण बताते हुए तीखा हमला बोला।

श्री ललित वर्मा, पुत्र ओमप्रकाश वर्मा, कोई बड़े किसान या प्रभावशाली व्यक्ति नहीं हैं। वे अपने पिता और ठेके की लगभग 120 बीघा भूमि पर दिन-रात मेहनत करते हैं। उनके पास ट्रैक्टर है, पंपिंग सेट है, और डीजल चालित वाहन हैं जो किसी भी किसान के लिए खेती-बाड़ी के काम में बुनियादी जरूरत हैं। डीजल का इस्तेमाल? वो भी पूरी तरह कानूनी और कृषि कार्य के लिए। फिर भी उनके खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7 के तहत मुकदमा दर्ज कर दिया गया।

पूर्व मंत्री हेमराज वर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “यह मुकदमा प्रथम दृष्टया तथ्यों के विपरीत है। यह किसान विरोधी है। उपलब्ध परिस्थितियों से साफ लगता है कि यह कार्यवाही द्वेषभावना और राजनीतिक दबाव में की गई है। उद्देश्य सिर्फ एक किसान को परेशान करना नहीं, बल्कि एक सम्मानित सामाजिक व्यक्ति की छवि को धूमिल करना है।

वे आगे बोले, अगर किसानों को इस तरह अनावश्यक मुकदमों में फंसाया जाएगा, तो यह अत्यंत चिंताजनक स्थिति होगी। हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।
प्रशासन पर सवाल, किसानों के हक की लड़ाई
हेमराज वर्मा ने जिला प्रशासन की निष्पक्षता पर सीधा सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अगर सत्ता के इशारे पर या किसी के व्यक्तिगत रंजिश के चलते किसानों को निशाना बनाया जा रहा है, तो लोकतंत्र और प्रशासनिक व्यवस्था दोनों पर सवाल उठता है।
उन्होंने प्रशासन से तीन स्पष्ट मांगें रखीं
1. पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
2. श्री ललित वर्मा के खिलाफ दर्ज फर्जी मुकदमे को तत्काल प्रभाव से निरस्त या वापस लिया जाए।
3. क्षेत्रवासियों द्वारा कल यानी 29 अप्रैल 2026 को प्रातः 10:30 बजे महामहिम राज्यपाल महोदया को संबोधित ज्ञापन जिला अधिकारी पीलीभीत को सौंपा जाएगा।

अंत में पूर्व राज्यमंत्री ने चेतावनी भरे शब्दों में कहा, यदि इस पीड़ित किसान को न्याय नहीं मिला, तो हमें लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा। किसान इस देश की रीढ़ है। उसे इस तरह तंग करना न सिर्फ अन्याय है, बल्कि पूरे कृषि समुदाय के साथ धोखा है।
क्या यह एक अलग थलग मामला है
यह मामला सिर्फ एक किसान का नहीं लगता। यह उस बड़े सवाल का हिस्सा है कि क्या वाकई प्रशासनिक मशीनरी कुछ लोगों की रंजिश या राजनीतिक हिसाब-किताब चुकाने के लिए इस्तेमाल हो रही है 120 बीघा जमीन पर खेती करने वाला, ट्रैक्टर-पंपिंग सेट चलाने वाला किसान अगर डीजल इस्तेमाल करने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम में फंसाया जा रहा है, तो सवाल उठता है क्या यह नियम किसानों के लिए हैं या उनके खिलाफ हथियार बनाए जा रहे हैं

हेमराज वर्मा, जो खुद पीलीभीत की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं, इस मुद्दे को उठाकर न सिर्फ एक व्यक्ति के पक्ष में खड़े हुए हैं, बल्कि किसान समुदाय के व्यापक असंतोष को आवाज देने की कोशिश की है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस पर कितनी गंभीरता से कार्रवाई करता है। क्या उच्चस्तरीय जांच होगी? क्या मुकदमा वापस लिया जाएगा? या फिर यह मामला भी लंबी अदालती प्रक्रिया में फंसकर रह जाएगा?
कल का ज्ञापन और आगे की घटनाएं इस पूरे प्रकरण की दिशा तय करेंगी। पीलीभीत के किसान और क्षेत्रवासी इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं।
क्या प्रशासन किसान की मेहनत का सम्मान करेगा, या राजनीतिक द्वेष की भेंट चढ़ने देगा? समय बताएगा।
