संवाददाता:- अरुन वर्मा, धर्मपाल सिंह

पीलीभीत:- प्रशासनिक सादगी और अनुशासन की नई मिसाल देखने को मिली है। ज्ञानेंद्र सिंह ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की अपील को गंभीरता से लेते हुए अपने स्कॉट और अतिरिक्त सरकारी वाहनों को हटाने का फैसला लिया है। इतना ही नहीं, ऑफिसर्स कॉलोनी में रहने वाले अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे अनावश्यक वाहन प्रयोग बंद करें और पैदल कार्यालय आया-जाया करें।डीएम के इस फैसले के बाद प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। आम जनता इस पहल को सरकारी संसाधनों की बचत, फिटनेस और सादगी से जोड़कर देख रही है। लोगों का कहना है कि जब जिले का सबसे बड़ा अधिकारी खुद उदाहरण पेश कर रहा है, तो बाकी विभागों को भी इससे सीख लेनी चाहिए।बताया जा रहा है कि यह कदम वीआईपी कल्चर कम करने, ईंधन बचाने और प्रशासनिक सादगी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया गया है। लंबे समय से आम जनता सरकारी गाड़ियों के दुरुपयोग और अफसरों के बढ़ते काफिलों को लेकर सवाल उठाती रही है।
ऐसे में डीएम का यह निर्णय चर्चा का विषय बन गया है।अधिकारियों को साफ संदेश दिया गया है कि छोटी-छोटी दूरियों के लिए सरकारी वाहनों का उपयोग न किया जाए। ऑफिसर्स कॉलोनी से कार्यालय की दूरी कम होने के कारण पैदल आने-जाने की व्यवस्था अपनाने को कहा गया है। इससे न केवल सरकारी खर्च में कमी आएगी बल्कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी।जिले में यह फैसला प्रशासनिक सादगी की नई शुरुआत माना जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी लोग डीएम की इस पहल की जमकर सराहना कर रहे हैं और इसे “जमीन से जुड़ा प्रशासन” बता रहे हैं।
