धर्मपाल सिंह की ब्यूरो रिपोर्ट पीलीभीत//
दो थार और बोलेनो कार सीज, नवदिया सुल्तानपुर में पुलिस बल तैनात/
पीलीभीत। गजरौला थाना क्षेत्र के नवदिया सुल्तानपुर गांव में पुरानी रंजिश ने रविवार को हिंसक रूप ले लिया। बर्थडे पार्टी के दौरान शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते फायरिंग और संघर्ष में बदल गया, जिससे पूरे गांव में दहशत और तनाव का माहौल बन गया। घटना में तीन लोगों को छर्रे लगने की सूचना है, जबकि पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। मामले को लेकर पुलिस प्रशासन पूरी तरह सक्रिय नजर आया।
जानकारी के अनुसार नवदिया सुल्तानपुर गांव में दो पड़ोसी पक्षों के बीच पहले से ही पुरानी रंजिश चली आ रही थी। बताया जा रहा है कि कुछ दिन पहले युवकों के बीच हुई कहासुनी के बाद दोनों पक्षों में तनाव बना हुआ था। रविवार शाम करीब पांच बजे गांव में चल रही एक बर्थडे पार्टी के दौरान दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। पहले कहासुनी हुई और फिर मामला अचानक उग्र हो गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक विवाद बढ़ने के साथ दोनों पक्षों के बीच फायरिंग और झड़प की स्थिति बन गई। इस दौरान कुलवीर सिंह पक्ष के सतेन्द्रपाल सिंह, सुखदेव सिंह और दलजीत सिंह छर्रे लगने से घायल हो गए। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और ग्रामीणों में भय का माहौल पैदा हो गया।
सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आई। क्षेत्राधिकारी (सीओ) के नेतृत्व में भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा और हालात को नियंत्रित किया गया। पुलिस के अनुसार घायलों को सतही चोटें आई हैं और कोई भी गंभीर रूप से घायल नहीं है।
मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर कार्रवाई तेज की गई। पुलिस ने दूसरे पक्ष के आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर हिरासत में ले लिया। साथ ही घटना में इस्तेमाल या संदिग्ध मानी जा रही दो थार और एक बोलेनो कार को भी सीज कर दिया गया है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पूरे प्रकरण में थाना गजरौला में सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर अग्रिम विधिक कार्रवाई की जा रही है। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग पुलिस टीमें भी गठित की गई हैं। गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात है और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।
नवदिया सुल्तानपुर की यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि ग्रामीण इलाकों में पुरानी रंजिश और छोटे विवाद किस तेजी से हिंसक रूप ले लेते हैं, जहां सामाजिक तनाव का समाधान समय रहते न होने पर हालात कानून-व्यवस्था की चुनौती बन जाते हैं
