कथित सपा नेता का शांति भंग में चालान नेतागिरी के रौब पर पुलिस की लगाम

बरेली, सिरौली।छोटे नगरों और कस्बों में अक्सर एक अलग तरह की सत्ता दिखाई देती है। यह सत्ता चुनाव जीतकर नहीं आती, बल्कि नाम, पहचान और कथित राजनीतिक पहुंच के सहारे पैदा होती है। कुछ लोग खुद को किसी नेता या दल से जुड़ा बताकर ऐसा माहौल बना देते हैं जैसे कानून उनके लिए अलग हो। सिरौली नगर से सामने आई घटना इसी तस्वीर को सामने लाती है।

नगर सिरौली में खुद को नेता और राजनीतिक रसूख वाला बताकर रौब झाड़ने वाले एक कथित सपा नेता पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए शांति भंग में चालान कर दिया। मामला अब पूरे नगर में चर्चा का विषय बना हुआ है।

आरोप है कि नगर निवासी सोनू रस्तोगी लंबे समय से बाइक पर पुलिस जैसी शैली में डंडा लगाकर घूमता था और सार्वजनिक स्थानों पर दबंगई दिखाते हुए अपना प्रभाव जमाने की कोशिश करता था। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार वह बीच रास्ते में बाइक खड़ी कर देता था और विरोध करने वालों से उलझने को तैयार हो जाता था। सवाल यह है कि आखिर यह आत्मविश्वास आता कहां से है? क्या राजनीतिक नामों का सहारा लेकर आम नागरिकों पर प्रभाव जमाना नई सामाजिक बीमारी बनता जा रहा है

मामले की शुरुआत बैटरी के विवाद से बताई जा रही है। नगर के धर्मेंद्र गुप्ता और गोविंद पांडे ने थाना सिरौली पुलिस को शिकायत देकर आरोप लगाया कि बैटरी खरीदने के बाद उसका बैकअप सही नहीं चला। जब शिकायत लेकर पहुंचे तो बात समाधान तक नहीं पहुंची बल्कि विवाद में बदल गई। आरोप है कि गाली-गलौच हुई और खुद को एक बड़े नेता का समर्थक बताते हुए दबाव बनाने का प्रयास किया गया।

शिकायत मिलने के बाद मंगलवार को पुलिस ने संबंधित पक्ष को थाने बुलाया। सूत्रों के अनुसार थाने में भी माहौल शांत नहीं रहा और पुलिस से नोंक-झोंक की स्थिति बन गई। इसके बाद पुलिस ने शांति व्यवस्था बनाए रखने के तहत सोनू रस्तोगी का शांति भंग में चालान कर दिया।

इसी कार्रवाई में राजवती, रतनलाल और चंद्रकेश समेत अन्य लोगों का भी शांति भंग में चालान किया गया है।

यह सिर्फ एक पुलिस कार्रवाई नहीं, बल्कि उस सोच पर सवाल है जिसमें कुछ लोग राजनीतिक पहचान को लाइसेंस समझ बैठते हैं। लोकतंत्र में नेता होना या किसी दल का समर्थक होना अपराध नहीं है, लेकिन यदि उसी पहचान के सहारे कानून को चुनौती देने की कोशिश हो तो फिर सवाल उठना स्वाभाविक है क्या नेतागिरी का मतलब कानून से ऊपर होना है

थाना पुलिस का संदेश साफ माना जा रहा है कानून की नजर में कोई बड़ा या छोटा नहीं। यदि शांति व्यवस्था भंग होगी और कानून से खिलवाड़ किया जाएगा, तो कार्रवाई भी होगी और जवाबदेही भी तय होगी।

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