पीलीभीत टाइगर रिजर्व की सड़कों पर रात्रि प्रतिबंध हटाने की मांग, विभिन्न संगठनों ने की प्रेस वार्ता

संवाददाता अजीम मिर्जा की रिपोर्ट

पूरनपुर में राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन की अध्यक्षता में गुरुवार को एक प्रेस वार्ता आयोजित कर पीलीभीत टाइगर रिजर्व की तीन प्रमुख सड़कों पर लगाए गए रात्रि प्रतिबंध को हटाने की मांग उठाई गई। प्रेस वार्ता में विभिन्न सामाजिक, व्यापारिक और परिवहन संगठनों के पदाधिकारियों ने एक स्वर में कहा कि 2 मार्च 2026 से लागू इस प्रतिबंध के कारण पूरनपुर और आसपास के लाखों लोगों का जीवन प्रभावित हो गया है।प्रेस वार्ता में बताया गया कि पीलीभीत टाइगर रिजर्व करीब 730 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसमें लगभग 602 वर्ग किलोमीटर कोर जोन और करीब 128 वर्ग किलोमीटर बफर जोन है। यह जंगल उत्तराखंड और नेपाल की सीमा से सटा हुआ है। इसी जंगल के बीच से पीलीभीत- पूरनपुर, पीलीभीत- मधोटांडा और मधोटांडा- खटीमा मार्ग गुजरते हैं। इन सड़कों पर रात के समय पूर्ण प्रतिबंध लगाए जाने से क्षेत्र के लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।पदाधिकारियों ने बताया कि पूरनपुर तहसील की दूरी पीलीभीत मुख्यालय से जंगल के रास्ते करीब 43 किलोमीटर है, लेकिन रात में यह मार्ग बंद होने के कारण लोगों को वैकल्पिक रास्ते से लगभग 100 किलोमीटर से अधिक दूरी तय करनी पड़ रही है, जिससे समय और खर्च दोनों बढ़ रहे हैं। पूरनपुर तहसील में 486 गांव आते हैं और इस क्षेत्र की बड़ी आबादी नेपाल, उत्तराखंड और जंगल से घिरी हुई है। ऐसे में रात के समय यह पूरा इलाका एक तरह से टापू बन जाता है।प्रेस वार्ता में कहा गया कि इस निर्णय से सबसे ज्यादा प्रभाव ट्रांसपोर्टर, टैक्सी और ऑटो चालकों, नाइट शिफ्ट में काम करने वाले मजदूरों, व्यापारियों, किसानों और आम नागरिकों पर पड़ रहा है। ट्रक और अन्य वाहन चालकों को बैरियर बंद होने के डर से जल्दबाजी में वाहन चलाने पड़ते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है। वहीं टैक्सी और ऑटो चालकों की आमदनी में भारी गिरावट आई है।पदाधिकारियों ने वन विभाग और राज्य सरकार से सवाल उठाते हुए कहा कि जब वर्ष 2014 में पीलीभीत को टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था, तब से अब तक इन सड़कों पर वन्यजीवों के लिए अंडरपास या ओवरपास का निर्माण क्यों नहीं कराया गया। साथ ही यह भी कहा कि अन्य टाइगर रिजर्व क्षेत्रों की तरह यहां भी काफिला (कन्वॉय) प्रणाली या स्थानीय निवासियों के लिए पास सिस्टम लागू किया जा सकता है।प्रेस वार्ता में सरकार से मांग की गई कि पीलीभीत टाइगर रिजर्व की इन प्रमुख सड़कों पर लगाया गया रात्रि प्रतिबंध हटाया जाए, वन्यजीव सुरक्षा के लिए अंडरपास और ओवरपास निर्माण की समयबद्ध योजना सार्वजनिक की जाए तथा प्रतिबंध से प्रभावित लोगों के आर्थिक नुकसान का आकलन कर राहत योजना बनाई जाए। इसके अलावा स्थानीय नागरिकों, ट्रांसपोर्ट संगठनों, व्यापारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ सार्वजनिक सुनवाई आयोजित करने की भी मांग उठाई गई।प्रेस वार्ता में गुरप्रीत सिंह (युवा तहसील अध्यक्ष, राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन), हाजी रियाजत नूर खान (जिला इंचार्ज, नागरिक सुरक्षा बल फाउंडेशन), नवीन अग्रवाल (प्रांतीय मंत्री, उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल), रामनिवास शर्मा (जिला उपाध्यक्ष, अखिल भारतीय प्रधान संगठन), पलविंदर सिंह (अध्यक्ष, टैक्सी एसोसिएशन पूरनपुर), विजयपाल विक्की (पूर्व अध्यक्ष, फल सब्जी आढ़ती संघ), हाजी लियाकत उर्फ भूरा भाई (अध्यक्ष, बस यूनियन) और सराफत अली (अध्यक्ष, ट्रक एसोसिएशन) सहित अन्य लोग मौजूद रहे।सभी संगठनों के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि अगले 15 दिनों के भीतर सरकार और वन विभाग की ओर से इस समस्या का कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया तो क्षेत्र के लोग बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।रिपोर्ट: अजीम मिर्जा, तहसील संवाददाता, पूरनपुर

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