संपादक इंद्रजीत सिंह राजपूत
पीलीभीत कोर्ट का बड़ा फैसला: 23 साल पुराने मामले में दो लोग दोषमुक्त; अधिवक्ता शुभम पाण्डेय की दलीलों से मिली जीत
पीलीभीत। स्थानीय अदालत द्वारा 23 वर्ष पुराने आपराधिक मामले में दो आरोपियों को दोषमुक्त किया जाना केवल एक फैसले तक सीमित नहीं है, बल्कि यह न्याय व्यवस्था में साक्ष्य और निष्पक्ष जांच की अनिवार्यता को रेखांकित करता है। वर्ष 2001 में दर्ज इस मामले में लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रियंका मौर्या की अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोप तभी टिक सकते हैं, जब वे “संदेह से परे” प्रमाणित हों।
मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से ठोस साक्ष्य प्रस्तुत न कर पाना न्यायिक प्रक्रिया की एक बड़ी कमजोरी को उजागर करता है। 23 वर्षों तक चले इस मुकदमे में आरोपित व्यक्तियों को न केवल कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ा, बल्कि सामाजिक और मानसिक दबाव भी सहना पड़ा। ऐसे मामलों में देरी और साक्ष्य की कमी न्याय की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न खड़े करती है।
इस प्रकरण में अधिवक्ता शुभम पाण्डेय की ओर से की गई प्रभावी पैरवी यह दर्शाती है कि मजबूत कानूनी तर्क और तथ्यों के आधार पर न्यायालय तक सच्चाई पहुंचाई जा सकती है। अदालत ने भी अपने निर्णय में उच्चतम न्यायालय के ‘रमेश हरिजन बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2012)’ के सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए संदेह का लाभ देने की आवश्यकता को दोहराया।
यह फैसला जांच एजेंसियों और अभियोजन पक्ष के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि किसी भी मामले में केवल आरोप पर्याप्त नहीं होते, बल्कि उन्हें ठोस साक्ष्यों के साथ न्यायालय में प्रस्तुत करना अनिवार्य है। अन्यथा वर्षों तक चलने वाली न्यायिक प्रक्रिया अंततः निरर्थक साबित हो सकती है।
साथ ही, यह निर्णय न्यायपालिका की उस भूमिका को भी मजबूत करता है, जहां अदालतें निष्पक्षता के आधार पर निर्णय देते हुए किसी भी व्यक्ति को बिना पर्याप्त प्रमाण के दोषी ठहराने से बचती हैं।
करीब 23 वर्षों तक चले इस मुकदमे के बाद आए इस फैसले से दोनों आरोपियों को बड़ी राहत मिली है। अदालत के निर्णय के बाद उन्हें सम्मानजनक रूप से दोषमुक्त कर दिया गया।
फैसले के बाद अधिवक्ता शुभम पाण्डेय ने इसे न्याय की जीत बताते हुए कहा कि हमारा उद्देश्य हमेशा सत्य और न्याय को अदालत के सामने लाना रहा है। 23 साल के लंबे इंतजार के बाद आज हमारे मुवक्किलों को सम्मानजनक न्याय मिला है न्यायालय ने माना है कि पुलिस द्वारा लगाए गए आरोप निराधार थे उन्होंने यह भी कहा निर्णय सत्य और न्याय की जीत का प्रतीक है। लंबे इंतजार के बाद न्याय मिलना इस बात का प्रमाण है कि न्यायपालिका पर भरोसा कायम रहना चाहिए।
