पीलीभीत में विकास के दावों के बीच संघर्ष की कहानी, जमीनी सच्चाई ने खोली पोल

पीलीभीत। उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र में बसे पीलीभीत की असल तस्वीर जानने के लिए जब रिपोर्टर अरुन वर्मा और धर्मपाल ग्राउंड जीरो पर पहुंचे, तो विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच हकीकत कुछ और ही नजर आई। गांवों में आज भी बुनियादी सुविधाओं की कमी साफ दिखाई दी, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी और निराशा दोनों देखने को मिली।

ग्रामीण इलाकों में अधूरी सुविधाएं

कई गांवों में सड़कें जर्जर हालत में हैं, पीने के पानी की समस्या बनी हुई है और स्वास्थ्य सेवाएं बेहद कमजोर नजर आईं। ग्रामीणों का कहना है कि योजनाएं तो कागजों में बनती हैं, लेकिन उनका पूरा लाभ जमीन तक नहीं पहुंच पाता

टाइगर रिजर्व के साये में डर का जीवन

प्राकृतिक रूप से समृद्ध पीलीभीत का गौरव पीलीभीत टाइगर रिजर्व है, लेकिन इसके आसपास बसे गांवों के लोगों के लिए यह डर का कारण भी बना हुआ है। ग्रामीणों ने बताया कि वन्यजीवों के हमलों से फसलें बर्बाद हो रही हैं, लेकिन सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं।

किसानों की बढ़ती परेशानी

कृषि क्षेत्र में भी हालात चिंताजनक हैं। गेहूं खरीद केंद्रों पर अव्यवस्थाएं और गन्ना भुगतान में देरी से किसान परेशान हैं। किसानों का आरोप है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद समाधान की गति बेहद धीमी है।

स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था बदहाल

ग्रामीण अस्पतालों में डॉक्टरों और दवाइयों की भारी कमी देखी गई। वहीं कई स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं जैसे शौचालय, फर्नीचर और पर्याप्त शिक्षक तक उपलब्ध नहीं हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

बड़ा सवाल — क्या बदलेगी तस्वीर?

अरुन वर्मा और धर्मपाल की इस स्पेशल रिपोर्ट ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या सरकार के विकास के दावे वाकई जमीनी स्तर पर उतर पाएंगे, या फिर पीलीभीत के लोग यूं ही समस्याओं से जूझते रहेंगे?

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